ब्रेकिंग कलयुगी बेटे ने मां बाप को मार कर भगाया घर से बाहर

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किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई , मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में मांई

मुनव्वर राना का ये शेर अपने आप में ये बताने के लिए काफी है कि आज देश में मां-बाप की हालत क्या है।

यही शेर आज के बच्चों में फर्क को भी साफ साफ दिखाता है, एक वो बच्चे हैं जिन्हें मां-बाप नहीं सिर्फ उनकी संपत्ति चाहिए और दूसरे वो जिनके लिए उनके माता पिता किसी भी चीज से ज्यादा बड़े हैं. जिन्हें संपत्ति नहीं, सिर्फ मां बाप चाहिए.

आज ऐसा ही किस्सा उन्नाव जिले के पुरवा कोतवाली के अंतर्गत तौरा गाँव से आया जो रोंगटे खड़े कर देने वाला था बूढ़े मां बाप को सबसे छोटे बेटे सुशील ने अपनी बूढ़ी मां को दाहिने पैर पर लाठी जब मारी तो मां की चीख निकल पड़ी।

और सीधा पुरवा कोतवाली आ गई बूढ़ी मां का यही कहना था कि मुझे रोटी दो या ना दो पर मुझे मकान में रहने दो लेकिन इस कलयुगी बेटे को कहां फर्क पड़ने वाला था मां की व्यथा अलग ही थी ।

रामेश्वरी पत्नी रिमेश पुलिस को शिकायती पत्र देते हुए बताया की मेरा छोटा बेटा मुझे मारता पीटता बहुत है और मुझे घर में नहीं रहने देता अपनी पत्नी के साथ मिलकर मुझ पर ज्यादा अत्याचार करता है।


आज के आधुनिक होते भारत की विडंबना यही है कि दूसरे किस्म के बच्चों की तादाद गिर रही है. आज बच्चे अपने माता-पिता को एक बोझ की तरह देख रहे हैं. ऐसा बोझ जिसे वो ढोना नहीं चाहते. शायद इसी लिए श्रवण कुमार के इस भारत में मां-बाप की सेवा करने के लिए भी कानून बनाने की जरूरत पड़ी है.

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