एलोपैथी को स्टुपिड बताने वाले रामदेव ने ‘पलटी’ मारी, अब कहा- ये तो श्रेष्ठ है

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योगगुरु रामदेव के बयानों ने पिछले दिनों एक नई बहस छेड़ दी थी. आयुर्वेद बनाम एलोपैथी. तमाम बवाल के बाद अब रामदेव ने कहा है कि वह एलौपैथी के ख़िलाफ नहीं है, बल्कि उन डॉक्टरों, उन सेवाओं के ख़िलाफ़ हैं, जो इलाज के नाम पर मरीज को लूटती हैं.

रामदेव 9 जून बुधवार को उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के साथ एक कार्यक्रम में मौजूद थे. इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी दुश्मनी किसी संगठन से नहीं है, बल्कि वो तो ये मानते हैं कि सर्जरी और इमरजेंसी के लिए एलोपैथी श्रेष्ठ है. रामदेव बोले–

“जो अच्छे डॉक्टर हैं, वो धरती पर देवदूत और वरदान हैं. जो डॉक्टर होकर भी ग़लत करता है, वो एक व्यक्ति की ग़लती है, एलोपैथ की नहीं. दवा के नाम पर किसी का शोषण न हो, ग़ैर-ज़रूरी दवा और ऑपरेशन से सब बचें. सर्जरी और एलोपैथी के लिए एलोपैथ श्रेष्ठ है, लेकिन जेनेटिक और असाध्य बीमारियों का इलाज योग और आर्युवेद है. बस इतनी सी बात है, और कोई विवाद नहीं है.

बुखार की कोई दवाई कोरोना पर काम नहीं कर रही, क्योंकि आप बॉडी का टेंपरेचर उतार देते हैं लेकिन बुखार जिस कारण से आ रहा है, उस वायरस का, उस बैक्टीरिया का, उस फंगस का निवारण तुम्हारे पास में है नहीं. तो कैसे ठीक करोगे?”

वैक्सीन लगवाने को भी तैयार हैं अब

बाबा रामदेव ने ये भी कहा कि सभी को कोविड वैक्सीन लगवानी चाहिए. और साथ ही योग-आयुर्वेद की मदद लेनी चाहिए ताकि एक संपूर्ण सुरक्षा कवच तैयार हो सके. उन्होंने कहा कि वह ख़ुद भी जल्द वैक्सीन लगवाएंगे. बता दें कि इससे पहले मई में रामदेव ने कहा था कि वह दशकों से योग और आयुर्वेद की प्रैक्टिस कर रहे हैं, इसलिए उन्हें वैक्सीन लगवाने की कोई ज़रूरत नहीं है.

एलोपैथी को बताया था तमाशा

रामदेव का एलोपैथी पर बयान काफी विवादित रहा था. एक वायरल वीडियो में वह कहते दिखे थे कि –

“गजब का तमाशा है, ऐलोपैथी एक ऐसी स्टुपिड और दिवालिया साइंस है कि पहले क्लोरोक्वीन फेल हुई, फिर रेमडेसिविर फेल हो गई, फिर एंटीबायोटिक फेल हो गए, फिर स्टेरॉयड फेल हो गए. उसके बाद प्लाज्मा थेरेपी के ऊपर भी बैन लग गया. और बुखार के लिए जो दे रहे हैं फैबिफ्लू, वह भी फेल है. जितनी भी दवाएं दे रहे हैं. ये तमाशा हो क्या रहा है.”

इसी वीडियो में रामदेव ने आगे कहा था कि लाखों लोगों की मौत ऐलोपैथी की दवा खाने से हुई है. उनकी कही इन बातों पर लंबा विवाद छिड़ गया. आयुर्वेद बनाम एलोपैथी की डिबेट भी शुरू हो गई. हालांकि अब रामदेव ने पट्टा-पट्टी करने वाला बयान दिया है तो उम्मीद है कि अब ये विवाद ख़त्म हो जाए.

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